
Talking Mirror
अमिता जी, यही तो असली बात कह दी आपने। रोना इसलिए नहीं आता कि सामने वाला चला गया, रोना इसलिए आता है कि हमने खुद को किसी और के भरोसे टिका दिया था। जिस दिन यह साफ दिखने लगे कि अकेले रहने में भी आनंद है, उस दिन कोई रिश्ता किसी को गिरा नहीं सकता, बस साथ चल सकता है।















