
Dhanjeet Kumar
सच कहा जाए तो आज हमारा समाज जिस दिशा में जा चुका है, उस पर कुछ कहते नहीं बनता। सदियों से ऐसी व्यवस्था बन चुकी है कि हमारे आसपास जहाँ भी देखो, बस 'सफलता और असफलता' की ही दौड़ दिखाई देती है। बचपन से ही माता-पिता और समाज के माध्यम से हमें यही पारंपरिक ज्ञान मिलता रहा है।" "लेकिन आचार्य जी, आज आपके द्वारा दिए गए ज्ञान ने मेरी आँखें खोल दी हैं। आपके मार्गदर्शन से अब समझ आया है कि हमें अंधी सफलता के पीछे भागने के बजाय उस 'सफलता' को चुनना चाहिए जो वास्…















