✍🏻 पोस्ट 18 | 2 अक्टूबर '26
💭 विषय— राजव्यवस्था और प्रशासन──────────
🏡 गाँव चलाता कौन है: प्रधान जी या पूरा गाँव?
फुलेरा में सड़क टूटे, नाली जाम हो या कोई काम अटक जाए, तो नज़र सबसे पहले प्रधान जी पर जाएगी।
लेकिन असली सवाल है:
क्या गाँव की हर समस्या और हर फैसले की जिम्मेदारी प्रधान की ही होती है?
🇮🇳 भारत में सरकार केवल केंद्र और राज्य तक सीमित नहीं है। 73वें संविधान संशोधन ने पंचायती राज को संवैधानिक आधार देकर शासन को गाँव के स्तर…
केवल आर्थिक बजट (पैसा) या कानूनी शक्तियां (अधिकार) सौंप देने भर से गांव का कायाकल्प नहीं हो सकता, यदि उन शक्तियों का इस्तेमाल करने वाले लोगों की सोच और नियत में बदलाव न आए ।
Govind
अगर पंचायत को अधिकार , पैसा और जवाब देही तीनों मिल जाए तो गांव में थोड़ा बदलाव आ सकता है, लेकिन ज्यादा जरूरी है कि उसे चलाने वालों की प्राथमिकताएं बदलें।
Pankaj Kumar
अधिकार व्यवस्था देता है, लेकिन सही सोच और जिम्मेदारी उसे बदलाव में बदलती है।
Patel Meet Narendrabhai
केवल व्यवस्था बदल देने से काम नही चलेगा उस व्यवस्था को चलनेवाला, प्राथमिकताए भी एसी रखनी पडेगी जिसमे पूरे गाँव का विकास हो और जो कुछ काम होना है उसकी लगातार निगरानी रखना भी जरुरी है और ग्राम सभा में शामिल होना और कुछ सवाल हो तो पूछना भी जरुरी है।
Savita Patel
केवल पंचायत को अधिकार पैसा और जवाबदेही मिल जाने से गांव पूरी तरह नहीं बदल जाएगा। इसके साथ पंचायत चलाने वाले लोगों के प्राथमिकताएं ,ईमानदारी, और जनहित की भावना भी बदलना जरूरी है । यदि निजी स्वार्थ के बजाय गांव के विकास को प्राथमिकता दें तो उपलब्ध संसाधनों का सही उपयोग होगा और शिक्षा स्वास्थ्य, सड़क, पानी जैसे सुविधाओं में सुधार आ सकता है। इसीलिए व्यवस्था के साथ उसे चलाने वाले लोगों की सोच और प्राथमिकताओं में बदलाव भी जरूरी है।
Rani manju
लोगों को अव्यवस्था खूब दिखती है और वे परेशान भी खूब होते हैं, पर सॉल्यूशन के लिए ईमानदारी चाहिए और उसके लिए ही गीता मिशन है।
Geeta
ईमानदारी और नीयत से ही सही बदलाव सम्भव है
Rekha Shewale
agar panchayat ko adhikar, paisa aur jaeabdehi tino mil jaye, to bhi keval vyavastha badlnese se gav nhi badal jayega, use chalane valo ki praathmiktaye bhi badalni hogi. aur praathmikta to vo apne swarth ko hi dete hai. unka apna hit sadhne के bad jo bachta hai vo fir gav ke vikas mein lgta hai.gav ke prati unki koi jimmedari hai aisa unko lgta bhi nhi, apna swarth hi sbse aage hota hai.
to yha bat apni niyat ko saf krne ki jarurat ki hai , nhi to vyavastha kitni bhi achhi bna di jaye, aakhir use chalane vale to manushya hi hai, vahi purani apni praathmiktaye, niji swarth, aur sankirn pahchan nirnayo को chala rhe ho to keval satta ka sthan bdlne se parinam nhi bdlega, ye aisa hi chalta aya hai aur yhi chal rha hai.
aur hm jab dekhte hai gav mein panchayat ko adhikar,paisa aur jawabdehi sab kuch mil jane ke bad bhi kuch bhi badlaav nhi hota, aur hota bhi hai to vo pura sachhai ke sath nhi hota, grampanchayat ko yojnaye to milti hai, pr kha jati hai pta nhi chalta,sab kuch jhooth chalta hai hr taraf.
isme kam krnevale log sb apne apne swarth के liye kam krte hai.sarkar se aanevala paisa gav ke vikas ke liye to 20% lagate honge, baki to sb kaha jata hai ye to hm sbko pata hai.
Gayatri Makwana
Agar panchayat ko bhi paisa ,sansadhan or swatantrata mil bhi Jaye tab bhi wo badal k achcha ho jayega uski koi guarantee nahi hai kyuki jo use chalane vale hai wo bhi to apne swarth ,lalach aur apni kamna se lipt hote hai jab tak unke pas atmgyan nahi hoga tab tak to unko apna hi Ghar dikhta hai dusro ki pareshani nahi dikhayi degi
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JITESH KUMAR TELI
उसे चलाने वालों की प्राथमिकताएँ भी बदलनी होंगी ।
Rachna Verma
व्यवस्था चलाने वाला अपनी नियत नहीं देखता
Sanket Sudhakar Mahajan
❓ अगर पंचायत को अधिकार, पैसा और जवाबदेही तीनों मिल जाएँ, तो क्या केवल व्यवस्था बदलने से गाँव बदल जाएगा, या उसे चलाने वालों की प्राथमिकताएँ भी बदलनी होंगी?
👉🏽 व्यवस्था को चलानेवालो की प्राथमिकताये भी बदलनी होगी |
vaishali bharti
सरकार बहुत सारी योजनाएं लाती हे लेकिन पैसा बीचवाले खा जाते हे। ओर लोकजागिरती हे नहीं।इसलिए कम कुछ होता नहीं।
Anil Kumar
गाँव चलाने वालों की नियत ,ईमानदारी बदलनी चाहिए, प्राथमिकताएं तो अपने आप बदल जाएंगी।
Preeti Patel
व्यवस्था तो बहुत मिली हुई है लेकिन गांव तक पहुंचती नहीं है क्योंकि बीच में सब खा जाते हैं। वो का भी इसलिए भी पाते हैं क्योंकि आम जनता भी जागरूक नहीं है कि उन्हें क्या क्या अधिकार मिले हुआ है।
Govind singh
मेरे ग्राम सभा के प्रधान ने लोगों को मांस, शराब और पैसे आदि वितरित किया था चुनाव पीरियड में और अन्य प्रत्याशियों ने भी ऐसा किया था तो अभी जो वर्तमान में प्रधान है, उसके इस भ्रष्ट आचरण को स्वीकार भी किया गया था चुनाव के समय में और अभी उसको गाली भी दे रहे हैं गांव वाले क्योंकि उसने काम अपने और अपने लोगों के स्वार्थ को ध्यान में रखकर किया।
Amisha khandey
प्राथमिकता बदलनी होगी फिर लोगो को भीतर से बदलना होगा ताकि बाहर से परिणाम आ सके।
Paras Kumari
लोगों की प्राथमिकता बदलनी होगी।
SURBHI KUNTAL
केवल व्यवस्था बदलने सेगांव नहीं बदलेगा उसे चलने वाले की प्राथमिकता भी बदलनी चाहिए।
Anu bishnoi
आत्म ज्ञान से ही सब संभव हो सकता हैं।🙏
Shilpi kumar
उसको चलाने वाले की प्राथमिकता भी बदलनी होगी
Romit
चलाने वालों की प्राथमिकताएँ भी बदलनी होंगी.
Aalka
use chalane walo ki prathmiktay badlni hogi.
Tanu
व्यवस्था चलाने वालों की प्राथमिकताएं बदलनी होगी l
Rani Mandloi
मनुष्य के केंद्र को बदलना होगा।
Ranjeet Singh
मै गाँव मे आज कल हु, मानसिकता ही चला रही है अब तक
जितने लोगो के यंहा गया
बस एक सवाल
बेटवा शादी कब करत अहा? 😂
और सिर्फ आय पूछा जाता है
आप जानते समझते कितना हो, कोई फर्क नही पड़ता
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Rajveer Sain
पंचायत को चलाने वालों की प्राथमिकता बदलनी चाहिए।
Vivek Kumar
प्राथमिकताएं बदलनी होंगी वरना वही भ्रष्टाचार कायम ही रहेगा क्योंकि इंसान तो बदला ही नहीं न।
सरोज सोनी
हम गाँव के लोग इतनें गंदे होते हैं प्रधान सड़क नाली सब बनवा भी देते हैं तब भी हम गाँव के लोग तोड़ फोड़ डालते हैं
Benu gupta
chalane walon ki prathmiktaen badalne honge unko imandari se kam karna hoga
✍🏻 पोस्ट 18 | 2 अक्टूबर '26 💭 विषय— राजव्यवस्था और प्रशासन ────────── 🏡 गाँव चलाता कौन…