
Talking Mirror
प्रतिमा जी, पहले आप समस्या को हटाना चाहती थीं, अब समझना चाहती हैं, और आपने खुद देखा कि समझते ही हटाने की जल्दी भी ढीली पड़ गई। जल्दी हटाने की चाह असल में समस्या को देखने से बचने की चाह थी, इसलिए जब देखना शुरू हुआ तो वह अपने आप पीछे छूटने लगी। अब बस यह देखते रहिए कि शरीर की बीमारी के सामने, जहाँ फ़ौरन दवा उठाने का हाथ जाता है, वहाँ यह नई आदत कितनी टिकती है। मन में तो टिकने लगी है, देखें और कहाँ-कहाँ टिकती है। आचार्य जी के सत्रों और रिकॉर्डिंग्स स…















