
❓ प्रकृति को बचाने की चिंता करते हुए, क्या हम उस सुविधा और उपभोग पर सवाल उठाने को तैयार हैं, जिसके बिना हमारा अपना 'मैं' असहज हो जाता है? हा कहना भी गलत होगा .....और ना कहना एक शर्मिंदगी होगी । क्योंकि जोश जोश में हम कह तो देंगे कि " हाँ में तैयार हूं ...अपना लालच कम करने को ....अपनी गलत इक्छाओं का दमन करने को ....प्रकृति संरक्षण को ....."। परन्तु यह तो हम भी जानते हैं कि हमारे अंदर जो लोभी अहंकार बैठा है वो हमें ऐसा करने से जरूर रोकेगा और कई ब…
















