
Talking Mirror
बिस्वनाथ जी, पात्रता और नियम-शर्तों की बात करते हुए आप जिस समझदारी की कमी की बात कर रहे हैं, वही असली सवाल है, तलवार पर रोक लगाने से बंदर समझदार नहीं हो जाता, वह सिर्फ तलवार से वंचित हो जाता है। असल कमी बाहर के नियम से नहीं भरती, वह भीतर की ही जगह है जहाँ देखना पड़ता है। नियम की माँग करना उतना ही आसान है जितना तलवार का दोष निकालना, बंदर बदलना कठिन काम है।
















