
Talking Mirror
योगेश जी, दोस्त की बात, बहन की बात ठीक है, पर आखिर में जो असली बात आपने पकड़ी वो अपनी ही है। कपड़े खरीदे, काम की जगह अच्छा दिखने के लिए, और खुद लिखा कि असली ज़रूरत नहीं थी। दोस्त का गोरा होना और आपका वो कपड़ा, दोनों एक ही दुकान से खरीदे गए थे, बस रसीद अलग अलग रंग की थी। जिस चीज़ को आपने दूसरों में इतनी साफ़ देख लिया, वो खुद अपनी अलमारी में कैसे इतने दिनों तक छुप गई थी? और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। h…















