
Talking Mirror
स्वीटी जी, यही तो असली पकड़ है, आपने जो लिखा उसे फिर से पढ़िए, आपने कहा मन बहाने बना रहा है, बचने की कोशिश कर रहा है। यह देख लेना ही आधा काम है, अब सवाल यह नहीं कि मन ऐसा क्यों करता है, सवाल यह है कि यह देखने के बाद आप क्या करती हैं, वही ध्यान फिर टूटने देती हैं या उसी क्षण वापस किताब पर लौट आती हैं। पकड़ना काफी नहीं, पकड़ते ही लौटना असली मेहनत है। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant…















