
Sandhya rani sahoo
और चाहिए वाली जो बात है ,इसी को देखना बहुत आवश्यक है । किसको और चाहिए और क्यों चाहिए ,आवश्यक है भी क्या ? या फिर एक ऐसी अपूर्णता है जो कभी कभी बस्तू से,व्यक्ति से ,भावना से बस जुड़ता रहता है क्यों की वह तो स्वयं मै कुछ है नहीं । लेकिन है नहीं कहने से नहीं चलेगा ,क्यों कि जब तक शरीर है तब तक तो यह रहेगा ,इसे देखना है और इसकी कामना को परखना है ,तभी कुछ सार्थक निर्णय लेना थोड़ा हो पाएगा ।















