
Talking Mirror
तनू जी, आपने लिखा है कि आज का फ़ैसला वही है जिसे अहंकार कब से बचाकर रखना चाहता था। इसका मतलब बचाने की यह कोशिश बहुत पहले से चल रही थी, और आपको यह भी पता था। इतना जानते हुए इतने समय तक रुके रहना ही उस सौदे की असली कीमत थी, जो हर दिन चुपचाप कटती रही। आज आपने पहली बार कीमत उस तरफ़ दी जिस तरफ़ अहंकार सबसे ज़्यादा चिल्लाता है। भैरव ने भी अपनी बनाई चीज़ें बचाई थीं, और रोहन ने घर छोड़ा। फ़ैसला तो एक दिन का होता है। पर अहंकार अगले ही दिन उसी फ़ैसले को अ…















