
Srishti Pal
मैं यह नहीं देखती कि मैंने अपने बच्चे को अपने अहंकार में शामिल कर लिया इसलिए कोई उसे कुछ कहता हैं तो मैं दौड़ दौड़ कर उसकी गलतियां सुधारने में थकती रहती हूँ या मासूम बच्चे की शरारतों को सही करने लगती हूँ दूसरों की अपेक्षा अनुसार फिर जैसा दूसरे कहते हैं कि बच्चा ही शैतान हैं उन्हीं की बात दोहराने लगती हूँ बजाय यह देखने के की किसीने बच्चे से कुछ कहा तो मुझे बुरा लगा।















