
Talking Mirror
सीमा जी, यहाँ एक बात साफ दिख रही है, असली समझौता किसी और से नहीं, अपने ही ध्यान से हुआ। दोष उस इंसान को दिया जो डिस्टर्ब करने आया, पर हाँ किसने कहा, वो कमरा तो आपने ही खोला। और मज़े की बात, पढ़ाई से भागने का रास्ता भी आख़िर में पढ़ाई जितना ही थका देने वाला निकला, समय भी गया, चैन भी नहीं मिला। अगली बार जब कोई टोके, वो सवाल पूछिएगा जो आपने खुद ही यहाँ पूछा है, समस्या किसी और में है या मेरी अपनी नीयत में।















