
Drishti Rai
1️⃣ चेतना एक द्वैतवादी परिघटना है, जिसके एक छोर पर अहंकार और दूसरे छोर पर विषय होता है। इस संरचना के बिना चेतना नहीं है। अहंकार के विगलन के बाद वैसी चेतना भी समाप्त हो जाती है, जैसी अहंकार उसे जानता है। 2️⃣ तंत्रिका विज्ञान चेतना को मुख्यत: मस्तिष्क और जैविक गतिविधियों से उत्पन्न अनुभव या जागरूकता के रूप में देखता है। वही AP framework चेतना को केवल मस्तिष्क की उपज मानकर नहीं रुकता, बल्कि यह पूछता है अनुभव करने वाला ’मैं’ कौन है और वह किस केंद…















