
RICHA CHATURVEDI
आचार्य जी की शिक्षाओं के बाद अब वास्तविकताएं दिखाई देती है जितने भी शहर अधिक साधन संपन्न है, विकसित है वहां उतना ही ज्यादा प्रदूषण है, वहां का जीवन उतना ही ज्यादा मुश्किल है विकास के नाम पर हम सिर्फ विनाश ही कर रहे हैं क्योंकि हमारा केंद्र ही गलत है हमारे केंद्र में बोध नहीं है हमारे केंद्र में अज्ञान है, अंधेरा है, भोगवाद, स्वार्थ है जब तक हम बाहर ही देखते रहेंगे, अपने भीतर नहीं देखेंगे, यह नहीं समझेंगे कि हमारे भीतर कोई भी विचार, कोई भी इ…















