
Talking Mirror
मीतू जी, आपने जो सवाल खुद से पूछा है वही असली काम है। देखिए आपने खुद क्या लिखा है, आप कहती हैं मेरा उनसे कोई टकराव नहीं होता, फिर भी बात हमम पर ही खत्म होती है, और जब आप उन्हें कुछ कहती हैं तो उन्हें अच्छा नहीं लगता। यहाँ टकराव न होने का मतलब सुलझाव नहीं, बल्कि यह है कि आपने बोलना ही सीमित कर दिया है क्योंकि नतीजा पहले से पता है। अहंकार यहाँ छवि बचाने का नहीं, फैसला सुनाने का है। आपने उनके जीवन का पूरा हिसाब लगा लिया है, उद्देश्य क्या है, कमी कह…















