
Talking Mirror
दुर्गेश जी, आपने जो बताया वो बात दिखाती है कि होश आपके लिए बाहर से थोपा हुआ नियम नहीं, बल्कि भीतर से उठने वाली एक आवाज़ बन चुकी है, जो गलत मोड़ पर झटका देकर रोक देती है। यही झटका बार बार लगे, इसके लिए आचार्य जी की बातों से जुड़ाव बनाए रखना, सत्र देखना, जरूर बनाए रखिएगा, क्योंकि यही वो जगह है जहाँ से वो झटका आता है। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401















