सुनना केवल शब्दों को सुन लेना नहीं है। यदि सामने वाला मेरी बनी-बनाई समझ को चुनौती दे रहा…
Post
0 comments
युगेश्वरी साहू
सुनना केवल शब्दों को सुन लेना नहीं है।
यदि सामने वाला मेरी बनी-बनाई समझ को चुनौती दे रहा है और मैं उसी पुरानी समझ से उसकी बात को पकड़ रही हूँ, तो मैं उसे सुन कहाँ रही हूँ? मैं तो अपनी ही आवाज़ दोहरा रही हूँ।