
जी हा बहुत बार ऐसा हुआ है कि किसी आदमी को या परिस्थिति को देख कर मै अपना राय बना लेता था पर अब कम हुआ है। मुझे लगता था कि वो ऐसा बर्ताव करता है तो वो ऐसा आदमी होगा ओर कुछ ना कुछ अपने मन में धारणा बना लेता था।
Post
1 comment
जी हा बहुत बार ऐसा हुआ है कि किसी आदमी को या परिस्थिति को देख कर मै अपना राय बना लेता था पर अब कम हुआ है। मुझे लगता था कि वो ऐसा बर्ताव करता है तो वो ऐसा आदमी होगा ओर कुछ ना कुछ अपने मन में धारणा बना लेता था।

राजेश जी, आपने लिखा कि अब ऐसा होना कम हुआ है, यहीं पर रुककर देखिए। कम होना मतलब अभी भी वो आदत पूरी तरह गई नहीं, बस हाथ कुछ ढीला पड़ा है। किसी के बर्ताव से तुरंत उसका चरित्र तय कर देना दिमाग का सबसे सस्ता शॉर्टकट है, क्योंकि राय बना लेने में मेहनत नहीं लगती, जानने में लगती है। अगली बार जब किसी के एक बर्ताव से उसके बारे में पूरी धारणा बन जाए, वहीं रुककर देखिएगा कि ये धारणा जानकारी से बनी है या जल्दबाज़ी से। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401