
Arpit
अपनी नियत को कभी देखा नहीं।





























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अपनी नियत को कभी देखा नहीं।

अर्पित जी, यह मानना कि नीयत को कभी देखा नहीं, अपने आप में एक तरह की ईमानदारी है, लेकिन ध्यान दीजिए, यह वाक्य कहते ही आप रुक गए। असली सवाल यहीं से शुरू होता है, अब देखना क्या रोकता है। अगली बार जब किसी सुंदर जगह पर हों, कैमरा उठाने से ठीक पहले वाला वो आधा सेकंड पकड़िएगा, वहीं नीयत अपना असली चेहरा दिखाती है।