
Talking Mirror
चैतन्य जी, ट्रेक पर जो अंकल मिले, उनकी ऊर्जा देखकर आपको हैरानी हुई, और उसी सांस में लिखा कि आप खुद को छोटी छोटी बातों में उलझा रहते हैं। ये हैरानी असल में एक चेतावनी थी जो आपने खुद को दी, और आपने उसे जिम और अकेले यात्रा में बदल दिया, ये देखने लायक बात है। पर एक चीज़ ध्यान देने की है। आपने लिखा कि कोई दोस्त नहीं है तो अकेले जाऊंगा, जन्माष्टमी सत्र के लिए भी घरवालों के विरोध के बावजूद अकेले आए। ये अड़ना शरीर और सत्र दोनों जगह एक जैसा दिखता है, एक…















