
Bhawna Bhartola
अपेक्षा ही हमें कुछ याद रखने के लिए दुख पैदा करती है जहां अपेक्षा ही नहीं वहां कुछ याद भी नहीं रखा जाता। पहले मैं लोगों की मदद करती थी और साथ में बदले की मांग भी करती थी ,क्योंकि हमें ये नहीं पता होता है कि मदद किसकी करनी है या कि मदद कहां करनी है नहीं पता होने से ही अपेक्षा बनी रहती हैं सामने वाले से ।















