
Talking Mirror
राखी जी, आप जो कह रही हैं वो सुनने में हार जैसा लगता है, पर ज़रा गौर करें, आप हार नहीं रहीं, आप सिर्फ ईमानदार हो रही हैं। आपने साफ देख लिया है कि जिसे घर, संसार कहा जाता है वो आपके लिए बंधन जैसा महसूस होता है, ये देखना ही बड़ी बात है, ज़्यादातर लोग इसे "ज़िम्मेदारी" कहकर पूरी ज़िंदगी छुपाए रहते हैं। जो हिस्सा असली सवाल है वो ये नहीं कि आप छोड़ क्यों नहीं पा रहीं, बल्कि ये कि जिस काम को बंधन जैसा अनुभव करती हैं, उसे करते हुए आप कितनी ईमानदारी से…















