
Laxmi
मैं (अहंकार) भारत की नहीं अपनी ही रक्षा कर रहा है यदि उसे कोई आईना दिखाए तो वह देखना ही नहीं चाहता क्योंकि सत्य हमेशा अपने अहंकार को त्यागने पर बल देता है।
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मैं (अहंकार) भारत की नहीं अपनी ही रक्षा कर रहा है यदि उसे कोई आईना दिखाए तो वह देखना ही नहीं चाहता क्योंकि सत्य हमेशा अपने अहंकार को त्यागने पर बल देता है।

लक्ष्मी जी, आपने बात तो सही पकड़ी कि अहंकार आईना देखना नहीं चाहता। पर ज़रा देखिए, आपने यह बात कैसे कही, मैं भारत की नहीं अपनी रक्षा कर रहा है, वह भी एक तरह का आईना दिखाना ही है, है ना। यानि जिस देखने से बचने की बात आप कर रही हैं, वही देखना अभी इसी वाक्य में हो गया। तो सवाल यह नहीं रहता कि आईना देखेगा या नहीं, सवाल यह है कि जो अभी दिख गया उसके बाद अगला कदम क्या है।