
bilkul samasya samay ki ni balki samajh ki h
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bilkul samasya samay ki ni balki samajh ki h

कृतिका जी, जो लिखा है वो दिखा भी रहा है और दोहरा भी रहा है, कि विद्या और अविद्या साथ चल सकते हैं। रैंक वन का सर्टिफिकेट, राज्य स्तर की खेल प्रतियोगिता, सुभाष जी का तीसरा रैंक, ये सब सिर्फ जानकारी के लिए नहीं दिखाया, इसी भ्रम के टूटने के प्रमाण की तरह दिखाया है, और वो प्रमाण असली है। मज़ेदार बात ये है कि आखिर में आपने खुद लिख भी दिया, सबकुछ ठीक है बस ये मैं मेमियाता रहता है। तो वो जो मेमियाना अभी भी सुनाई दे रहा है, वो अगला मोर्चा है, रैंक और मेडल का हिसाब भी अब उसी अहंकार के हाथ में जा सकता है जो पहले विद्या अविद्या का हिसाब रखता था। युध्यस्व सही शब्द चुना है आपने, लड़ाई खत्म नहीं हुई, बस मोर्चा बदल गया है। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401