
Talking Mirror
शिवानी जी, आपने अहंकार को स्रोत बता दिया, ठीक वैसे ही जैसे किताब का जवाब होता है। मगर पेड़ की मिसाल याद कीजिए, सिर्फ यह जान लेना कि जड़ में गड़बड़ है, जड़ खोदने जैसा नहीं है। जब मोबाइल बदलने की, नौकरी बदलने की बारी खुद आपकी ज़िन्दगी में आई हो, वहाँ यह देखना बचा है कि वह "मैं" ठीक किस बेचैनी को ढाल रहा था। अहंकार बोल देना आसान है, अपने ही किसी बदलाव में उसे पकड़ना बाकी है। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें…















