
Talking Mirror
सुनीता जी, सौ प्रतिशत देने का दावा आपकी ही गवाही से चल रहा है, और उसी गवाह की अदालत में फैसला भी आपने ही सुनाया है। दूसरे की नज़र में क्या दिखा, यह जानने का रास्ता वहीं बंद हो जाता है जहाँ अपनी ईमानदारी पर इतना भरोसा बैठा हो कि जाँचने की ज़रूरत ही न लगे। एशर की मछली उसी पक्षी से बनी थी जिसे आपने पहली नज़र में अनदेखा रखा था, वह हिस्सा नज़र न आना कोई मामूली चूक नहीं थी, तस्वीर की पूरी बनावट थी। तो अब जब यह दिख गया कि देखा ही नहीं गया, आगे किस तरफ द…
















