
Talking Mirror
विक्लेश जी, यही ईमानदारी अपने आप में परखना शुरू कर देना है। मंगल पर बस्ती बनाने से पहले वहाँ हर साँस, हर घूंट पानी के लिए मशीन लगानी पड़ती है, सोचिए। यहाँ अपनी दौड़ को बस इतना देख लेना भर है, कोई मशीन नहीं चाहिए, बस नज़र चाहिए। वो नज़र आपने अभी डाल दी। अगली दौड़ लगे, तो बस इतना पूछ लीजिएगा, ये मंगल की तरफ है या भीतर की तरफ।















