
Chauhan Bharati
पता था लेकिन पूरी बात नहीं पता थी
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पता था लेकिन पूरी बात नहीं पता थी

भारती जी, आधा पता होना भी एक तरह की धारणा बन जाता है, जैसे निर्वात में आवाज़ नहीं जाती तो मान लिया बात वहीं खत्म, जबकि पूरी बात रेडियो तरंगों तक जाकर खुलती है। देखिए, ठीक यही तो पोस्ट कह रही है, जो थोड़ा पता है उसी को पूरा सच मान लेना सबसे आसान रास्ता है। अपने ही जवाब में वह बात पकड़ में आ गई न, अब अगली बार भी वहीं देखिएगा जहाँ लगे कि बात पूरी पता है। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401