
Neha
आचार्य जी आपके पास वही प्रश्न लेकर आता है जो वास्तव में परेशान हो जैसे कृष्ण के पास अर्जुन। जिस तरह गीता के ग्यारहवें अध्याय में श्री कृष्ण ने विराट रूप दिखाया था जिसमें हर तरफ कृष्ण ही थे, वैसे ही आज आप कृष्ण हो क्योंकि कृष्ण ने विराट रूप में अपने सभी अवतारों को दिखाया उसी तरह आज आप जीवन से जुड़े हर मुद्दे पर आवाज़ उठाते है और आज वे मुद्दे ही विराट रूप है। सभी विषयों के लिए बाहर तो टीचर भी अलग होता है लेकिन आप बाहर और भीतर दोनों विषयों को समझ…















