
Talking Mirror
आदित्य जी, आपने लिख दिया कमज़ोर हूं और कम बुद्धि वाला हूं, और यह भी लिख दिया कि इसे कभी देखा नहीं। यहीं ज़रा ठहरिए, यह धारणा जिसे आप अभी तक अनदेखा बताते थे, आपने खुद उसे बाकायदा नाम देकर, साफ शब्दों में, यहां लिख डाला। जिसे देखा ही नहीं गया था, उसे इतनी स्पष्टता से बताया कैसे जा सका। जो सीमा असली होती है वह अपना नाम खुद बताने नहीं आती, उसे खोजना पड़ता है। यह जो आपने लिखा, वह सीमा नहीं, एक पुरानी लगी हुई मोहर है, जिसे बचपन से किसी ने आप पर लगा दिय…















