
Vivek Singh
सबसे गहरी बात यही लगी कि गुंडा अकेले ताकतवर नहीं होता, समाज का डर और मौन भी उसे ताकत देता है। कहीं न कहीं हम भी अपने भीतर के छुटपन के कारण भौकाल को सच से बड़ा बना देते हैं। सवाल है—मैं कहाँ ऐसा कर रहा हूँ?
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सबसे गहरी बात यही लगी कि गुंडा अकेले ताकतवर नहीं होता, समाज का डर और मौन भी उसे ताकत देता है। कहीं न कहीं हम भी अपने भीतर के छुटपन के कारण भौकाल को सच से बड़ा बना देते हैं। सवाल है—मैं कहाँ ऐसा कर रहा हूँ?