
Rashmi
ऐसा लगता है जैसे अपनी ही कहानी किसी और की ज़ुबान से सुन रही हूं। मैं भी फिर से वापस स्कूल ज्वाइन करना और आत्मनिर्भर होना चाहती हूं। पर २३ साल के अंतराल से मुझमें आत्मविश्वास की कमी हो गई है। फिर इस बात से भी घबराती हूं कि नौकरी के चक्कर में कहीं आचार्य जी से दूरी न हो जाए। आज दिनभर मैं रिकॉर्डिंग देखने, पोस्ट पढ़ने, बोध कार्य करने, परिक्षा की तैयारी में बिताती हूं। इसमें थोड़ा भी घरेलू कामों से कॉम्प्रोमाइज करना पड़ता है तो मैं बेचैन हो उठती हूं।…















