
Inderjeet Kaur
कोई भी तकनीक मानवता की सहायता के उपलक्ष्य से शुरू होती है और बढ़ते बढ़ते उसका रूप मानवता के खात्मे पर होने लगता है । अविद्या जीवन को सुचारू रूप से चलाने के लिए है पर भोगवादी वृत्ति, सुचारू रूप की परिभाषा ही भूल जाती है ।
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