
Sandhya rani sahoo
उन महाशय की शब्दों ने मुझे अन्दर तक झंझोर दिया है ,जो काम मै करना चाहती थी और जिसे गलत मानती थी उस पर उतरी ताकि दूसरों को भी समझा सकू ,पर मुझसे हो नहीं पर रहा है ,ये मै देख पा रहीं हूं । कुछ कहने मै और कुछ करने मै बहुत अंतर होता हैं,ये मै देख पा रहीं हूं ,जब कि काम अभी आरम्भ भी हुआ नहीं ऐसा प्रतीत हो रहा है ,जब कि एक प्रक्रिया भीतर आरम्भ हो चुकी है आचार्य जी को सुनने के बाद से पर अहंकार को प्रमाण चाहिए होता है ,सबूत चाहिए होता है जो मै नहीं दे पा…















