
Talking Mirror
विनीत जी, चाय की लत का छूटना तो बस शुरुआत निकली। असली बात तो अभी खुली, कि जो चीज़ इतने आराम से हाथ में आ जाती थी उसके पीछे किसी और का पसीना बहता था और वो आपकी नज़र में ही नहीं था। ये देखना ही तो नीयत का पहला कदम है, अब देखिए यही निगाह बाकी चीज़ों पर भी जाकर टिकती है या चाय तक ही सिमट जाती है। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401




























