
Jyoti bagmaar
हां मैं मानती हूं पहले मैंने किसी भी परंपरा पर सोच विचार नहीं किया बिना करके ही उसे मान लिया है विद्रोह की भावना तो पहले भी थी किंतु जब से आचार्य जी को सुना है तब से पूरी ताकत आ गई है बिना किसी सोच विचार और गहराई से अवलोकन करने के बाद में किसी परंपरा को मानना है या नहीं हमारा निर्णय है मेरा मानना यह है कि सभी परंपराएं बुरी नहीं होती असली परंपराएं वह होते हैं जो हम अपने देश को समाज को आगे लेकर जाए उसे एक नई दिशा दें उसे सही अर्थ दे उसे एक सुरक्षित…















