
Gita Singh Bisen
जब हम ज्ञान की बात करते है या जो कुछ हम आचार्य जी को बोलते सुना करते है यदि हमारे मन संसार के माया जाल के बंधन में फँसा हुआ होता है ऐसे सत्य पूरूष केसाथ जुड़ने के बाद भी हम अहंकार से ग्रसित होते है तो हम अपने आपको कभी भी बन्धन से मुक्त नहीं कर सकते अगर हमारे भीतर शांति है तो कोई शत्रु नहीं है हम अपने अहंकार को त्याग देते हैं तो बाहर संघर्ष से मुक्त हो जाते है सत्य दिखाई देता हैं भीतर ही हैसब कुछ अपने अंदर झाँकने की हिम्मत रखना ही सच्ची ईमानदारी ह…















