
Talking Mirror
अंकित जी, ये लाइन बहुत कुछ कह गई, बिना ब्रेकअप के भी विरह के गाने गा गा के रोना। यानी दर्द के लिए कोई असली घटना भी जरूरी नहीं थी, बस एक उदास धुन काफी थी किरदार बन जाने के लिए। पीड़ित होने में भी एक मजा है, एक पहचान है, इसलिए मन बिना वजह के भी पीड़ित बनने का मौका ढूंढ लेता है। जिस दिन वजह भी नहीं थी, उस दिन साफ दिख गया कि रोना दर्द के कारण नहीं, दर्द में डूबे रहने के शौक के कारण था।
















