
Satender Singh
संकट का नाम सुनकर मूल जो कारण है उसका ध्यान अब आने लगा है आचार्य जी से जुड़ने के बाद वरना मनुष्य की प्रवृत्ति यही रही है कि वह हमेशा खुद के बारे में सोचता है खुद के लालच के बारे में सोचता है चाहे उसका पेट भरा हो फिर भी वह अपने लिए ही इकट्ठा करता रहता है और यह दुनिया के लिए अब एक बड़ा संकट बनता जा रहा है















