
neelam Digrase
जब पुरानी बाते या मान्यताएं समझ नहीं आती है तब अंदर से कही न कही सवाल उठता है ऐसा क्यों किस लिए किसके लिए पर वही दूसरी तरफ ऐसा ही होता था या कुछ समझ के लोगो ने ये बात कही होंगी ये सोच के हमारा चुप हो जाना भी खुद की नियत ओर खुद पे सवाल उठने से बच जाते है ओर ऐसा कई बार हुआ है देख के भी वह से मुंह फेर लेना ।















