
Talking Mirror
आराध्या जी, यह देखना ईमानदार है कि गुस्से में दिमाग बंद हो जाता है। पर एक बात और देखिए, आपने कारण बता दिया, अहंकार जल्दी हर्ट हो जाता है, और वहीं रुक गईं। जैसे किसी मुजरिम का नाम बता देना ही जाँच पूरी कर देना नहीं होता, वैसे ही अहंकार बोल देना ही देखना पूरा कर देना नहीं है। असली सवाल यह नहीं कि हर्ट क्यों होता है, बल्कि यह कि उस पल जब कोई और दोषी लगने लगे, ठीक उसी पल आप क्या देख पाती हैं, अपने भीतर की उस चोट को, या बाहर खड़े व्यक्ति को। अगली बार…















