Talking Mirrorरूबी जी, जुड़ने की चाहत उठी है तो उसे यूँ ही मन में मत रहने दीजिए, दबी हुई इच्छा किसी काम की नहीं। सत्रों से जुड़िए, वहाँ जो सीखने को मिलता है उसी से आगे की राह भी दिखेगी कि संस्था के साथ काम करने का कदम कैसे बढ़ाना है।