
Rajdeep Rathod
बड़े सपने, अच्छे विचार होना मात्र काफी नहीं होता, जब कमजोरी हमारे सामने बैठी रहती है, और हम उसे देख देख कर, दुखी होते, मन हल्के होने को, उसी के सामने हम मनोरंजन करते रहते हैं यहां वहां।
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बड़े सपने, अच्छे विचार होना मात्र काफी नहीं होता, जब कमजोरी हमारे सामने बैठी रहती है, और हम उसे देख देख कर, दुखी होते, मन हल्के होने को, उसी के सामने हम मनोरंजन करते रहते हैं यहां वहां।

राजदीप जी, यह जो आपने पकड़ा है वो सीधा-सीधा वही है जो पोस्ट पूछ रही थी, और आपने अपने ऊपर लागू करके देखा। कमज़ोरी सामने बैठी है, दुख होता है, और फिर मन हल्का करने के लिए मनोरंजन में भाग जाना, यह ठीक वही दूरी है जो खुदीराम और हमारे बीच है। दुख होना तो सेहत की निशानी है, जी को चुभन महसूस होती है इसलिए। असली फिसलन वहाँ है जहाँ चुभन को मिटाने के लिए हम दृश्य से भाग जाते हैं। अगली बार जब कमज़ोरी सामने बैठे और मन कहे थोड़ा मनोरंजन कर लें, वहीं रुक कर देखिएगा, क्या यह असल में आराम है या सिर्फ भागना है।