
Anil Kumar
मैं भी जब घर में देखता हूँ तो मम्मी सब कहती हैं कि हमें कौन-सा मोह है? हम तो यही चाहते हैं कि हमारे घर की रोटी-पानी चलता रहे, बाकी हमें कोई मोह नहीं है। लेकिन उन्हीं को मैं जानता हूँ कि कोई भी रिचुअल आए, तो वो अलग ही बन जाती हैं। तब मैं उन्हें कहता हूँ कि ये क्यों किया? अगर आपको फर्क नहीं पड़ता, तो कहती हैं—एक दिन मरना ही है, क्या करना है दुनियादारी और रिचुअल से? हम थोड़ी इनसे लड़ सकते हैं... और इसी तर्क से वो उन रिचुअल्स को आगे बढ़ा रहे होते ह…















