
Arti Gupta
🎯 तो सवाल यह है कि, इसी वक़्त, मैं क्या दौड़‑दौड़कर पकड़ने की कोशिश कर रही हूँ, यह मानकर कि अबकी बार यह काफ़ी हो ही जाएगा? और जब मैं उसे पा लूँगी, तो क्या मैं सचमुच देखना चाहूँगी कि आगे क्या होता है, या बिना देखे‑समझे बस अगली चीज़ की ओर हाथ बढ़ा दूँगी? और अगर मैं सच में इसे देखती भी हूँ, तो मेरा इरादा क्या होगा - इस पैटर्न को साफ़‑साफ़ पहचानना, या बस इसे और चालाक तरीक़े से चलाए रखना? 🪞🪞ठीक ऐसा ही होता है मेरे साथ लगातार जैसे कि अगर मैं जॉब खोजती…















