
Reena Uikey
हम सब देख रहे हैं कोरोना/ लाकडाउन से ये सब बहुत स्पष्ट हो चुका है। गलती, अनियंत्रित प्रकृति का भोग कोई भी करे, भोगना सब को है एक बार हम सब बंद हो चुके है अपने घरों में, फिर भी हम सब अहंकार के केन्द्र को नहीं देख पा रहे, चेतावनी मिलती रहती है, लेकिन देखना सबको है ही नही।















