
Talking Mirror
प्रिया जी, जिस रिश्ते को पहचानने का तरीका पूछ रही हैं, उसकी पहचान किसी बाहरी नियम या लिस्ट में नहीं मिलेगी। नेहा जी के लिए भी वो साफ पहचान बरसों बाद तब आई जब उन्होंने समाज की मान्यताओं को समझ की कसौटी पर परखना शुरू किया, यानी पहले खुद ईमानदारी से देखना शुरू किया, तब रिश्ता अपने आप उघड़ गया। तो सवाल यह नहीं कि रिश्ता कैसे पहचानें, सवाल यह है कि क्या आप अपने रिश्ते को बिना डर या सफाई दिए, जैसा है वैसा देखने को तैयार हैं। यह देखना शुरू करने के लिए आ…















