
Shriram Singh
❓ अगर रोंगटे खड़े होने का फैसला हमने नहीं लिया, तो शरीर में होने वाली कीतनी प्रक्रियाओं को हम सच में कह सकते हैं कि "मैने किया"? 🐒 हमारे लिए तो रोंगटे खड़ा होना अहंकार को और सघन ही कर जाता है क्योंकि हम इतना सतर्क ही नहीं रहते हैं कि इस बात का आकलन और अवलोकन कर पाए की रोंगटा खड़ा हुआ तो यह काम शरीर का था तब समय तो यही समझ में आता है कि मैंने कुछ किया जिससे शरीर में प्रतिक्रिया हुई। 🐒 प्रायः हम शरीर में होने वाली किसी भी प्रतिक्रिया को देखना सम…















