
shashikant singh
हमे लगता है कि समस्या व्यक्ति में है क्योंकि उसके वैसा होने में उसका अज्ञान ही है पर उस अज्ञान को बरकार तो वही खुद रखता है। नियत नहीं होती उससे बाहर होने की। जैसे सामने वाला लोकधर्मिक हो , अंधविश्वासी हो और उसे हम उससे बाहर लाना चाहे पर वो चाहता ही न हो , तो यहां हम उस व्यक्ति में ये थोपना ही चाहते है ,तो क्या ये गलत है? गलत है तो उस स्थिति में क्या करना चाहिए।















