
Ranjan Kumar
सूखे के बाद राहत और व्यवस्था में सुधार, ये पर्याप्त नहीं है। जब तक हम व्यक्तिगत स्तर पर यह नहीं देखेंगे कि यह जो और चाहना है, यह कहाँ से आ रहा है। क्या यह हमारे ही अंधविश्वास और अधूरेपन से आ रहा है? तब तक कोई समाधान नहीं होगा।
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